Rajendra prasad biography in hindi. Dr Rajendra Prasad Biography in Hindi डा राजेंद्र प्रसाद की जीवनी 2019-01-28

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Rajendra Prasad Biography in Hindi डा. राजेन्द्र प्रसाद , एक महान और विनम्र राष्ट्रपति

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Rajendra Prasad was born into a big joint family in Ziradei village of Siwan district near Chhapra of Bihar. He travelled the world extensively as an ambassador of India, building diplomatic rapport with foreign nations. The film was also screened at the London Film Festival, the Indian Film Festival of Los Angeles, the New York Asian Film Festival and in , New York. मगर भोजन के लिए राजेन्द्र बाबू हमें एक छोटे से भोजन के कमरे में ले गये. They opposed the Congress Socialists.

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डा.राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी

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At the age of 12 he was married to Rajvanshi Devi. He therefore advocated the revival of old village industries and widespread use of the charkha spinning-wheel and khadi as efficacious means for rehabilitating India's village economy. During that period, he passed on the relief work to his close colleague. Published by Lok Sabha Secretariat, 1990. After the tragic murder of police by satyagrahis in Chauri Chara on 4 February 1922, Gandhi immediately called a halt to his noncooperation movement. Thus, his life was an epitome of leadership, virtue, acumen, powerful speech and refined personality.

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Rajendra Prasad Biography

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यह विशेष गुण जीवन पर्यन्त उनमे रहा और इसी गुण ने राजेन्द्र प्रसाद को विशिष्टता भी दिलाई. Dr Rajendra Prasad Biography in Hindi Dr Rajendra Prasad is the first president of Independent India. After retirement, he returned to Patna, living in Sadaqat Ashram, the headquarters of the in Bihar. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वह उस संविधान सभा के अध्यक्ष थे जिसने संविधान की रूप रेखा तैयार की। उन्होंने कुछ समय के लिए स्वतन्त्र भारत की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप भी में सेवा की थी। राजेन्द्र प्रसाद गांधीजी के मुख्य शिष्यों में से एक थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रारंभिक जीवन डॉ. Before entering politics, he taught , history, economics, and law. राजेन्द्र प्रसाद पांच या 6 वर्ष के रहे होंगे, जब उन्हें और उनके दो चचेरे भाइयो को एक मौलवी साहब पढ़ाने के लिए आते थे.

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Rajendra Prasad

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He received his elementary education at the village and then studied at Chapra District School, where he excelled. He was one of those passionate individuals who gave up a lucrative profession to pursue a greater goal of attaining freedom for the Motherland. राजेंद्र प्रसाद को काफी प्रभावित किया। जब गांधीजी बिहार के चंपारण जिले में तथ्य खोजने के मिशन पर थे तब उन्होंने राजेंद्र प्रसाद को स्वयंसेवकों के साथ चंपारण आने के लिए कहा। गांधीजी ने जो समर्पण, विश्वास और साहस का प्रदर्शन किया उससे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति थे उनका जीवन सार्वजनिक इतिहास है वह सादगी ,सेवा , त्याग और देशभक्ति के प्रतिमूर्ति थे स्वतंत्रता आन्दोलन में अपने आपको पुरी तरह से होम कर देने वाले राजेन्द्र बाबू अत्यंत सरल और गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे वह सभी वर्ग के लोगो से सामान्य व्यवहार रखते थे लगभग 80 वर्षो के उनके प्रेरक जीवन में साथ साथ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दुसरे चरण को करीब से जानने का एक बेहतर माध्यम उनकी आत्मकथा है Rajendra Prasad डा. राजेन्द्र प्रसाद चुने गये थे सविधान पर हस्ताक्षर करके डा. Prasad was deterred, however, by opposition from his elder brother, Mahendra Prasad.


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भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीवनी

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Gandhi felt the need to start a vidyapeeth seminary at Patna for those students who had boycotted government educational institutions. Prasad eventually emerged as a popular and eminent figure of the entire region. In 1934, he was elected the President of the Indian National Congress during the Bombay session. He shared Gandhi's great vision of peace and rural development, and to realize this goal, he argued for the need for a fundamental change in the prevailing system of education. उनमे चरित्र की दृढ़ता और उदार दृष्टिकोण की आधारशिला बचपन में ही रखी गई थी. Disaster manager Bihar was devastated by a terrible earthquake on 15 January 1934, after which Prasad immediately organized a massive relief campaign, raising a fund of 38 lakh 3.

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His early schooling was from the district of Siwan in the Chapra district school. Rajendra Prasad राजेन्द्र प्रसाद In office 26 January 1950 — 13 May 1962 Prime Minister Vice President Preceded by Succeeded by Personal details Born 3 December 1884 1884-12-03 Ziradei, , Died 28 February 1963 1963-02-28 aged 78 Political party Spouse s Rajvanshi Devi Presidency College Dr. इस बीच कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद राजेन्द्र प्रसाद कई प्रसिद्ध वक़ीलों, विद्वानों और लेखकों से मिले. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद — About Dr Rajendra Prasad In Hindi राजेन्द्र बाबू Dr Rajendra Prasad के पिता महादेव सहाय संस्कृत एवं फारसी के विद्वान थे एवं उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं। पाँच वर्ष की उम्र में ही राजेन्द्र बाबू ने एक मौलवी साहब से फारसी में शिक्षा शुरू किया। उसके बाद वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए छपरा के जिला स्कूल गए। गाँव का जीवन पुरानी परम्पराओं से भरपूर था। इनमें से एक रिवाज था- बाल विवाह और परम्परा के अनुसार राजेन्द्र प्रसाद का विवाह भी केवल बारह वर्ष की आयु में राजवंशी देवी से हो गया था। विवाह के बाद भी उन्होंने पटना की टी० के० घोष अकादमी से अपनी पढाई जारी रखी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी रहा और उससे उनके अध्ययन अथवा अन्य कार्यों में कोई रुकावट नहीं पड़ी। लेकिन वे जल्द ही जिला स्कूल छपरा चले गये और वहीं से 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी। उस प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। सन् 1902 में उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। यहाँ उनके शिक्षकों में महान वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस और माननीय प्रफुल्ल चन्द्र रॉय शामिल थे। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ विधि परास्नातक की परीक्षा पास की और बाद में विधि के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की। राजेन्द्र बाबू कानून की अपनी पढाई का अभ्यास भागलपुर, बिहार में किया करते थे। यद्यपि राजेन्द्र बाबू की पढ़ाई फारसी और उर्दू से शुरू हुई थी तथापि बी० ए० में उन्होंने हिंदी ही ली। वे अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी व बंगाली भाषा और साहित्य से पूरी तरह परिचित थे तथा इन भाषाओं में सरलता से प्रभावकारी व्याख्यान भी दे सकते थे। गुजराती का व्यावहारिक ज्ञान भी उन्हें था। एम० एल० परीक्षा के लिए हिन्दू कानून का उन्होंने संस्कृत ग्रंथों से ही अध्ययन किया था। हिन्दी के प्रति उनका अगाध प्रेम था। हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं जैसे भारत मित्र, भारतोदय, कमला आदि में उनके लेख छपते थे। राजेन्द्र प्रसाद प्रतिभाशाली और विद्वान थे और कलकत्ता के एक योग्य वकील के यहाँ काम सीख रहे थे। राजेन्द्र प्रसाद का भविष्य एक सुंदर सपने की तरह था। राजेन्द्र प्रसाद का परिवार उनसे कई आशायें लगाये बैठा था। वास्तव में राजेन्द्र प्रसाद के परिवार को उन पर गर्व था। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद का मन इन सब में नहीं था। राजेन्द्र प्रसाद केवल धन और सुविधायें पाने के लिए आगे पढ़ना नहीं चाहते थे। एकाएक राजेन्द्र प्रसाद की दृष्टि में इन चीज़ों का कोई मूल्य नहीं रह गया था। भारतीय राष्ट्रीय मंच पर महात्मा गांधी के आगमन ने डॉ. He left his lucrative legal practice at the call of Mahatma Gandhi, ceased serving as a senator of Patna University, and withdrew his sons, Dhananjay and Mrityunjay, from their British educational institutions. Published by Patriot Publishers, 1991. He passed Intermediate level classes then called as F.

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भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीवनी

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However later on he left the college for his legal studies. Telugu people emigrated abroad would take Prasad's movies along with them, such was the popularity and impact of his films on at least two generations of Telugu people. लेकिन परिवारवालों की इच्छा के विरुद्ध वह कोई भी कदम उठाना नहीं चाहते थे इसलिए उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया. राजेंद्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया। आज़ादी के ढाई साल बाद 26 जनवरी 1950 को स्वतन्त्र भारत का संविधान लागू किया गया और 1950 में भारत जब स्वतंत्र गणतंत्र बना, तब अधिकारिक रूप से संघटक सभा द्वारा डॉ. An outstanding student, an erudite scholar, a true humanist, and a deeply religious person, he committed himself to the cause of his country and remained in the vanguard of India's freedom struggle, guiding the destiny of the new nation after independence. He urged people to boycott Government schools, colleges and offices. His many writings include his autobiography tr.

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डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीवनी

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Congress was again faced with a similar crisis in 1947 when Acharya Kriplani resigned, and Prasad again took on the presidency, always trusted by his colleagues. Kripalani resigned from the post. He placed first in the entrance examination to the University of Calcutta and was awarded Rs. During the May 31, 1935 earthquake, when he was forbidden to leave the country due to government's order he set up Quetta Central Relief Committee in and under his own presidentship. In 1962, after serving twelve years as the president, he announced his decision to retire. राजेन्द्र प्रसाद उनसे मिले और उनकी विचारधारा से प्रभावित हुए 1919 में पुरे भारत में सविनय आन्दोलन की लहर थी गांधी जी ने सभी स्कूल ,सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने की अपील की ,जिसके बाद डा. When Mohandas Gandhi arrived in Bihar in 1917 to assist the peasants in Champaran, Prasad soon joined in this activity, becoming a lifelong disciple of Gandhi.

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