Subhash chandra bose in hindi. सुभाष चन्द्र बोस 2019-02-17

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सुभाष चन्द्र बोस का जीवन परिचय Subhash Chandra Bose Biography Hindi

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अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2013. The second World War broke out in September of 1939, and just as predicted by Bose, India was declared as a warring state on behalf of the British by the Governor General, without consulting Indian leaders. But Bose still remained optimistic, thought of regrouping after the Japanese surrender, contemplated seeking help from Soviet Russia. It is told that he was last seen on land near Kiel canal in Germany, in the beginning of 1943. Thevar mobilised all south India votes for Bose. Later the chair was kept at the residence of Netaji at 51, University Avenue, Rangoon, where the office of the Azad Hind Government was also housed. Bose appeared at the 1939 Congress meeting on a stretcher.

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबन्ध

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During the mid-1930s Bose travelled in Europe, visiting Indian students and European politicians, including. His mentor was who was a spokesman for aggressive nationalism in. नेताजी को भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए किये गए प्रयत्नों के लिए हमेशा याद रखा जायेगा. In the consensus of scholarly opinion, Subhas Chandra Bose's death occurred from third-degree burns on 18 August 1945 after his overloaded Japanese plane crashed in now. Ten minutes after the accident he was taken to the Army Hosptal in Taihoku and received treatment at 15.


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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबन्ध

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A little later, Bose was again arrested and jailed for ; this time he emerged to become Mayor of in 1930. However, he expressed admiration for the authoritarian methods though not the racial ideologies which he saw in Italy and Germany during the 1930s, and thought they could be used in building an independent India. The series was praised by both audience and critics, for its plot, performance and production design. The strangest and most confusing testimony comes from A. A few days before his escape, he sought solitude and, on this pretext, avoided meeting British guards and grew a beard. At the outset of the war, he left India, travelling to the , and , seeking an alliance with each of them to attack the British government in India. अभिगमन तिथि 18 अगस्त 2013.

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Subhash Chandra Bose Jayanti Messages Wishes SMS In Hindi

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की उच्च परिक्षा पास करके बङी सरकारी नौकरी करेंगे और परिवार की समृद्धि एवं यश की रक्षा करेंगे किन्तु जिस समय वे विलायत में थे, उसी समय अंग्रेजी सरकार के अन्यायपूर्ण नियमों के विरुद्ध गाँधी जी ने सत्याग्रह संग्राम छेङ हुआ था। सरकार के साथ असहयोग करके उसका संचालन कठिन बनाना, इस संग्राम की अपील थी। गाँधी जी से प्रभावित होकर सुभाष अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोङकर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गये। आई. He started the newspaper and took charge of publicity for the Bengal Provincial Congress Committee. Subhash Chandra Bose सुभाष चन्द्र बोस Quote 7: I have no doubt in my mind that our chief national problems relating to the eradication of poverty, illiteracy and disease and the scientific production and distribution can be tackled only along socialistic lines. अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2013. Despite the obvious anguish, they chose to keep their relationship and marriage a closely guarded secret.

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Subhash Chandra Bose quotes in hindi, नेता जी सुभाष चंद्र बोस के अनमोल विचार ( वेस्ट सुविचार )

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यथा सभंव नेता जी की मौत नही हूई थी 16 जनवरी 2014 गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया। आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार साल 2018 मे ने किसी प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया। 11 देशो कि सरकार ने इस सरकार को मान्यता दी थी। सुभाष के पिता जानकीनाथ बोस का सन् 1905 का चित्र विकिमीडिया कॉमंस से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को के शहर में हिन्दू परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी थे मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक काम किया था और वे के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार को का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 सन्तानें थी जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष उनकी नौवीं सन्तान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरद चन्द्र से था। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थे। सुभाष उन्हें मेजदा कहते थे। शरदबाबू की पत्नी का नाम विभावती था। सुभाष का उन दिनों का चित्र जब वे सन् 1920 में इंग्लैण्ड आईसीएस करने गये हुए थे कटक के प्रोटेस्टेण्ट यूरोपियन स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में उन्होंने रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया। कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। मात्र पन्द्रह वर्ष की आयु में सुभाष ने विवेकानन्द साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था। 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने के बावजूद द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में जब वे दर्शनशास्त्र ऑनर्स में बीए के छात्र थे किसी बात पर प्रेसीडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया सुभाष ने छात्रों का नेतृत्व सम्हाला जिसके कारण उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज से एक साल के लिये निकाल दिया गया और परीक्षा देने पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया। 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट में भर्ती के लिये उन्होंने परीक्षा दी किन्तु आँखें खराब होने के कारण उन्हें सेना के लिये अयोग्य घोषित कर दिया गया। किसी प्रकार स्कॉटिश चर्च कॉलेज में उन्होंने प्रवेश तो ले लिया किन्तु मन सेना में ही जाने को कह रहा था। खाली समय का उपयोग करने के लिये उन्होंने टेरीटोरियल आर्मी की परीक्षा दी और फोर्ट विलियम सेनालय में रँगरूट के रूप में प्रवेश पा गये। फिर ख्याल आया कि कहीं इण्टरमीडियेट की तरह बीए में भी कम नम्बर न आ जायें सुभाष ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और 1919 में बीए ऑनर्स की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। में उनका दूसरा स्थान था। पिता की इच्छा थी कि सुभाष आईसीएस बनें किन्तु उनकी आयु को देखते हुए केवल एक ही बार में यह परीक्षा पास करनी थी। उन्होंने पिता से चौबीस घण्टे का समय यह सोचने के लिये माँगा ताकि वे परीक्षा देने या न देने पर कोई अन्तिम निर्णय ले सकें। सारी रात इसी असमंजस में वह जागते रहे कि क्या किया जाये। आखिर उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया और 15 सितम्बर 1919 को इंग्लैण्ड चले गये। परीक्षा की तैयारी के लिये लन्दन के किसी स्कूल में दाखिला न मिलने पर सुभाष ने किसी तरह किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास ऑनर्स की परीक्षा का अध्ययन करने हेतु उन्हें प्रवेश मिल गया। इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी। हाल में एडमीशन लेना तो बहाना था असली मकसद तो आईसीएस में पास होकर दिखाना था। सो उन्होंने 1920 में वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली। इसके बाद सुभाष ने अपने बड़े भाई को पत्र लिखकर उनकी राय जाननी चाही कि उनके दिलो-दिमाग पर तो और महर्षि के आदर्शों ने कब्जा कर रक्खा है ऐसे में आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे? Bose arrived in Germany in April 1941, where the leadership offered unexpected, if sometimes ambivalent, sympathy for the cause of India's independence, contrasting starkly with its attitudes towards other colonised peoples and ethnic communities. Usually closer aide of Mahatma Gandhi used to get elected; but this time Subhash Chandra Bose got elected with higher votes. However, due to the manoeuvrings of the Gandhi-led clique in the Congress Working Committee, Bose found himself forced to resign from the Congress presidency. The islands were renamed Shaheed Martyr and Swaraj Independence. His sudden disappearance from Taiwan, led to surfacing of various theories, unfortunately none of which were investigated thoroughly by successive governments; leaving people in the dark about one of the most beloved leaders India has ever produced. But his urge for participating in the freedom movement was intense that in April 1921, Bose resigned from the coveted Indian Civil Service and came back to India.


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नेताजी सुभाषचंद्र बोस जीवनी

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In an answer to my question about the marriage, he wrote to me in 1978: 'I cannot state anything definite about the marriage of Bose referred to by you, since I came to know of it only a good while after the end of the last world war. Some lay down and kissed, some placed pieces of mother earth on their heads, others wept. All it needed was a hero rather than a Gandhi-style saint to revive the culture and steer India to life and freedom through violent contentions of world forces vishwa shakti represented in imperialism, fascism and socialism. अभिगमन तिथि २३ जनवरी २०१८. Achievement He was one of the most prominent leaders in the Indian independence movement. In 1927, after being released from prison, Bose became general secretary of the Congress party and worked with for independence.

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Subhas Chandra Bose

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पृ॰ 501 से 503 तक. There is circumstantial evidence to prove that he was in Russia after that date in 1945. Bose believed that Gandhi's tactics of non-violence would never be sufficient to secure India's independence, and advocated violent resistance. However, the findings were rejected by the government of India. But instead of being delighted, Bose was worried. Here, he was ridiculed by his fellow students because he knew very little Bengali. In India the 's official line was succinctly expressed in a letter wrote to.

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस जीवनी

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Once in Russia the transported Bose to where he hoped that Russia's traditional enmity to British rule in India would result in support for his plans for a popular rising in India. I can imagine the marriage having been a very informal one. And Led Indian National Army. It was brought to Calcutta on the 17th July, 1980. He also adored Vivekananda as his spiritual Guru. Subhas Chandra Bose, travelling with Gandhi in these endeavours, later wrote that the great enthusiasm he saw among the people enthused him tremendously and that he doubted if any other leader anywhere in the world received such a reception as Gandhi did during these travels across the country. But in death he was a martyred patriot whose memory could be an ideal tool for political mobilization.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती २०१९

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Army leadership, administration and communications were managed by Indians only. Subhash Chandra Bose सुभाष चन्द्र बोस Quote 4: Remember that the greatest crime is to compromise with injustice and wrong. So what are we left with? We know they had a close passionate relationship and that they had a child, Anita, born November 29, 1942, in Vienna. In Germany, he was attached to the under which was responsible for broadcasting on the German-sponsored. He was undoubtedly a patriot, though misguided. Disappearance of Subhash Chandra Bose Although it was believed that Netaji Subhash Chandra Bose died in a plane crash, his body was never recovered. However, Bose found the Soviets' response disappointing and was rapidly passed over to the German Ambassador in Moscow,.

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